Demonetisation pushed debt-ridden farmers into ruin: Shiv Sena

"After years, monsoon last year brought hope to farmers and they had a bumper production but the knife of demonetisation led them to sell their produce at dirt cheap rates. They couldn't even recover their input costs and as a result, debt ridden farmers plunged deeper into losses," the Sena said

By: PTI | Mumbai | Updated: June 7, 2017 1:52 pm
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The Shiv Sena on Wednesday hit out at the Centre for pushing debt-ridden farmers into greater despair and allowing their farms to fall into ruin by brandishing the “knife of demonetisation”. In an editorial in its mouthpiece Saamana, the bickering ally also questioned the apathy of the government towards the agricultural sector at a time when industry and the services sector received periodical boosts for their development.

“After years, monsoon last year brought hope to farmers and they had a bumper production but the knife of demonetisation led them to sell their produce at dirt cheap rates. They couldn’t even recover their input costs and as a result, debt ridden farmers plunged deeper into losses,” the Sena said.

The government, it said, came to power with the promise of developing the agriculture sector. But today, it keeps threatening to get the sector taxed. “It is easy to win elections right from panchayat to municipal corporations. If you have the money, you can win an election even on the moon. This does not mean people are your servants. To understand farmers feelings, it needs to be understood that they are not mere vote banks,” it added.

The Sena edit also sought to know why the BJP was shying away from a loan waiver if it could spend “hundreds of crores” in elections.

“If the CM says he will only talk to real farmers leaders, then only real farmers from the government should hold talks with those real farmers’ leaders. But, does your government have a single real farmer?” it asked.

Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis had on Monday said the government would talk only to protesting farmers and not others and that the government would not enter into a dialogue with those trying to agitate farmers. The Sena said that those questioning the wastage of farm produce during the strike should also answer if there wasn’t any wastage when farmers were not agitating.

“Prices of crude oil have plummeted to lowest levels, but did inflation cease? Last year, there was bumper crop production due to good monsoon, but did prices of vegetables come down ? Three years passed by, but were promises of ‘Acche Din’ delivered,” the Sena asked.

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  1. M
    MS
    Jun 9, 2017 at 3:26 pm
    We agree with ShivSena. Its true that Modi is working without vision and without his capability. Modi is not able to earn a single Rs on his own but know to waste others' money. Modi is not useful to anyone but he is anti to Farmers, Army-retired soldiers, teachers, etc but favouring and giving huge monetary benefits to Industrialists. Industrialists are getting crores of loans from banks via Govt. and not paying while farmers and others are not getting loans.. Is Modi blind or purposely doing for his own enjoyments. ? We are not getting GAS subsidy and taking big big things for Aadhar cards. Nobody reply from NPCI (National Payment Corporation, Mumbai). Modi is eating public money. We dont want Modi at all..who is not able to work as even watchman or peon.
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    1. S
      Sudhir Batra
      Jun 8, 2017 at 12:48 pm
      Shiv Sena should quit NDA if their concerns for farmers are real.
      Reply
      1. M
        MS
        Jun 9, 2017 at 3:29 pm
        Is it the solution ? or you just want to anyway favouring hopeless and nonsense modi bjp ? Why are you not thinking that this so called capable Modi was barking like dog before election for farmers and now nto doing anything .. Country doe not want Modi. ShivShen need to to quit but Modi must quit Govt and thatshould be done by bjp ppl.
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      2. R
        Ramesh Rao Neramballi
        Jun 8, 2017 at 8:49 am
        Atleast, they have the guts to say what's what even though they are friends with BJP.Hats Off to samna
        Reply
        1. L
          Lakshman Jha
          Jun 7, 2017 at 6:39 pm
          भारत ही नहीं समस्त विश्व में दो ही ब्रेकिंग न्यूजों ने विगत ०८ नवम्बर २०१६ से अपना वर्चस्य बनाये रखा ! एक डोनाल्ड ट्रम्प की जीत अमेरिका में तो दूसरा मोदी जी के चमकते आर्थिक तलवार का प्रहार ! ट्रम्प की जीत अमेरिका को संभवतः बदल डाले पर मोदी जी के प्रहार से सामान्य लोगों की सामत आ गयी ! फिलहाल ये दोनों मुद्दे इस कदर छाये हुए हैं जो चाह कर भी विश्व के दूसरे समाचारों पर नजर ही नहीं टिकती ! ट्रम्प के जीतने के बाद उनके विचारों में परिवर्तन और कुछ अनोखा करने की ललक उन्हें महान बना देगा ! पर असली मुदों से भागना यदि सीखना हो तो मोदी जी की भंगिमा का अनुकरण करना सीख लो ! आज अपने देश के नागरिकों के साथ रहने की आवश्यकता थी पर दूसरे ही दिन जापान पहुँच गए ! माना कि यह भी एक 'सर्जिकल स्ट्राइक ' थी पर देश में कई और मौलिक समस्यायें मुँह वाये खड़ी हैं ! उसका समाधान करना उनकी पहली प्राथिमिकता होनी चाहिए ! इस प्रहार की रणनीति की योजना तो इनलोगों ने तो पहले से ही बना रखी थी ! जंग लगे हथियारों ,बिना धार वाले को स्वयं के लिए रख लिए और धार वाले अश्त्रों का प्रयोग हम पर हुआ !
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          1. L
            Lakshman Jha
            Jun 7, 2017 at 6:32 pm
            लाख कठिनाइयों के बावजूद भी अधिकांशतः भारतीय मीडिया मोदी जी के तारीफों में जम कर लगे हैं ! अभी सर्जिकल स्ट्राइक का जश्न थमा भी नहीं था ,मोदी जी के धूनों पर थिरक रहे थे ! फिर एक बार नच बलिये का स्टेज सज गया ! आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक के धून बजने लगी ! मोदी जी का संगीत पुनः एक बार गूंजने लगा और वसी भारतीय मीडिया थिरकने लगे ! क्या फर्क पड़ता है इनको ... लोग मरते रहें ,....कतार लगाते रहें और मुश्किलों को झेलते रहे ,पर इन्हें टिकट नहीं मिल सकता ! हाँ ब्लैक में टिकट लेना हो तो काउंटर से आप ले सकते थे ! व्यापार ठप्प ,काम काज ठप्प ,शादी विवाह ठप्प पर चांदी तो सत्ता से जुड़े लोग और काउंटर में लगे लोगों की ही थी ! जिस भ्रष्टाचार को मिटाने की बात करके नच बलिये का मंच सजा था आज इसका खुलके दरुपयोग हो रहा था ! यह सिर्फ हम ही नहीं कह रहे थे सारा विश्व इसकी आलोचना कर रहा था ! द गार्डियन ,वाशिंगटन पोस्ट ,अल्ज़जीरा और हफिंगटन पोस्ट के मीडिया कर्मिओं ने तो मोदी जी के मंच को नकारा भी था साथ साथ भारतीय मीडिया के िया नाच से भी हम क्षुब्ध थे ! ...पता नहीं हमारे मीडिया कार्मी मोदी जी के भक्त ..
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            1. L
              Lakshman Jha
              Jun 7, 2017 at 6:23 pm
              उन दिनों सम्पूर्ण देश में भले ही अफरातफरी मची थी ,लोग अपने काम काज को छोड़ ए० टी० एम० के दरवाजे खटखटा रहें थे ,बैंकों के सामने लम्बी -लम्बी कतारें लगी थी ,शादियाँ रुकीं पड़ीं थीं ,व्यापार भले ही पटखनी खा चुका था पर मोदी जी के इस अदम्य शाहस को लोग एक अच्छा कदम बता रहें थे ! जितने ५०० और १००० के नोट दबे पड़े थे वे सारे निकल रहें थे ! सत्ताधारी पार्टिओं ने तो इसे ' आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक ' का नाम दे दिया ! इस सर्जिकल स्ट्राइक को सोवियत यूनियन , उत्तर कोरिया,ज़ायर,म्यांमार,घाना और नाइजीरिया ने भी झेला था ! पर परिणाम इसके अच्छे ना निकले ! कहीं इसे वापस लेना पड़ा और कहीं जनताओं ने शासकों को सत्ता से बेदखल कर दिया ! इन सर्जिकल स्ट्राइकों से भ्रष्टाचारिओं के अच्छे दिन आ गए थे ! बैंकों के कर्मचारिओं और दलालों के पांचों उँगलियाँ घी में थे और सर कढ़ाई में ! ी में हमें यह लग रहा है कि अब भ्रष्टाचारियों ,घूसखोरों और बईमानों के अच्छे दिन आ गये थे ! ....यह तो मानना ही पड़ेगा कि मोदी जी के क़दमों की सराहना फिलहाल अधिकांश लोग कर रहे थे ! पत्रकारिता ,टी वी और मीडिया व्याजस्तुति में तल्लीन थी !
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              1. L
                Lakshman Jha
                Jun 7, 2017 at 6:11 pm
                अधिकांशतः शासक भले ही प्रजातान्त्रिक प्रणाली के द्वारा क्यों न चुने गए हों परन्तु उनके हृदय में निरंकुशता की ललक रहती ही है ! सीरिया ,टर्की ,मिश्र ,रूस ,फिलिपीन और दुनियां के तमाम शासकों से पूछ कर देख लीजिये उनके सम्पूर्ण शरीर से निरंकुशता की बू मिलेगी ! सत्ता का नशा ही कुछ ओर ही है ! फिर भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिका के राष्ट्रपति इनसे अछूते कैसे रहेंगे ? दोनों ने कई वादों ,कई सपनों अपनी जनताओं को दिखाकर सत्ता हासिल किया ! मोदी जी ने जो सपना भारतीओं को दिखाया उसे भूल गए ! पर ट्रम्प ने जो वादा अपने अमेरिका वासी से किया था उसे पूरा करने के लिए ही तो 'ट्रेवल बेन 'का आदेश दिया ! न्यायपालिका के झटके के वाबजूद ट्रम्प हार मानने वाले नहीं हैं ! युवाओं को रोजगार देना और 'ब्रेन ड्रेन 'को रोकना उनका लक्ष्य है ! मेक्सिकन दीवार बनाने पर अड़े हुए हैं ! वैदेशिक नीतिओं की धारा को मोड़ना चाहते हैं पर 'वन चाइना ' पालिसी पर उन्हें झुकना पड़ा ! रूस के वे एहसानमंद हैं ! तमाम अमेरिकन नीतिओं को दरकिनार करते हुए पुतिन के साथ दोस्ती करना चाहते हैं ! हमारे मोदी जी जनता को कुछ देना नहीं चाहते हैं !
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                1. S
                  Salunke SR
                  Jun 7, 2017 at 2:54 pm
                  Shiv Sena is a useless part. They are enjoying power, at the same time they are showing as if they are with farmers and they are against government. Their Motive is BJP Ke Saath Bhi and BJP Ke Baad Bhi.
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